करे योग, रहें निरोग-पाद-हस्तासन , योग गुरू सुनील सिंह के साथ

पाद-हस्तासन

इस आसन में हाथों से पांवों को झुककर पकडा जाता है। इसलिए इसे पाद-हस्तासन कहते हैं।

 

विधि

पैरों को मिलाकर खड़े हो जायें। कमर को आगे की ओर झुकायें, दोनों हाथों से दोनों पैरों के अंगूठे पकड़ें। जब आप अभ्यस्त हो जायें,तब सिर को दोनो बांहों के बीच से घुटनों की तरफ़ झुकाते हुए नाक घुटने से लगायें । फिर धीरे-धीरे श्वांस भरते हुए वापस आयें। यह इस आसन का एक चक्र हुआ। इसका कम-से-कम 10 चक्रों का अभ्यास करें।

 

लाभ

यह आसन कमर की सबलता, लचीलेपन और उसकी अस्थियों की मजबूती को विकसित करता है। पेट एवं अमाश्य के दोषों को रोकता है, कब्ज़ नाशक है, त्वचा रोगों के लिए रामबाण का काम करता है।

 

सावधानियां

कमर दर्द, हृदय रोगी तथा उच्च रक्तचाप के रोगी इसका अभ्यास नहीं करें।

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