योग करें निरोग रहें- योग करे सावधानी से, योग गुरू सुनील सिंह

योग में  सावधानी हटी, दुर्घटना घटी

योग पर चर्चा चलते ही सहज रूप में अनेक स्वामियों और योग गुरुओं के नाम हमारे दिमाग में घूम जाते हैं और आज गुरुओं  और चैनलों की जुगलबंदी के कारण समूचा भारत योगमय होता जा रिहा है और इसमें कोई शक नहीं कि हमारी अपनी संस्कृति और धरोहर आगे बढ़ रही है।इतना ही नहीं कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति से उकताकर आम लोगों की रूचि भी योग के प्रति बढ़ी है। किन्तु महत्वपूर्ण बात यह है कि नए अभ्यासियों को योग के विघ्नों की भी जानकारियां होनी चाहिए।

मैं एक योग गुरु होने के नाते और अपने गुरु से सीखे हुए योग तथा अनुभव के आधार पर कुछ विघ्नों के बारे  में विस्तार से बताना चाहूंगा। जो लोग योग का अभ्यास करते हैं, यदि वो इन विघ्नों पर ध्यान देंगे, तो वे लोग कम समय में योग से ज्यादा लाभ उठा पायेंगे।

  1. अत्याहार: यानी अत्यधिक भोजन करना, यदि साधक अपनी क्षमता से ज्यादा भोजन रोज ग्रहण करेगा, तो उससे वह निंद्रा, तंद्रा, आलस्य और प्रमाद से घिर जायेगा, जो कि योग साधना में बाधक हैं। साधक को हमेशा अपनी क्षमता से आधा ही भोजन ग्रहण करना चाहिए, इससे वह अपना ही नही बल्कि समस्त राष्ट्र की भी भलाई कर रहा है।
  2. अतिप्रयास: यानी क्षमता से अधिक प्रयास करना, जो कोई भी साधक अपनी शक्ति से ज्यादा प्रयास करता है, तो वह रोगयुक्त हो जाता है; जैसे कुछ अभ्यासी शीर्षासन को गुरुओं के कहे अनुसार अपनी क्षमता से ज्यादा और कम समय में सारे फायदे लेने के प्रयास करते हैं, और रोगग्रस्त हो जाते हैं क्योंकि यह आसन गृहस्थ के लिए मना है और इसको गलत तरीके या अधिक करने से गर्दन आदि उच्च रक्तचाप, आखों में दोष, हृदय रोग के बढ़ जाने की समस्या, मस्तिष्क के सूक्ष्म तंतुओं के टूटने का ख़तरा बना रहता है।इसलिए आवश्यक है कि किसी विशेषज्ञ की देख रेख में ही इसका अभ्यास करें।
  3. प्रजल्य: इसका तात्पर्य यहां पर व्यर्थ के विवाद से लिया गया है। जैसे कि असत्य भाषण करना, व्यर्थ के विवाद में रहना, पूर्णस्य से पूर्वाग्रह से ग्रस्त रहना, अनुयायी को राष्ट्र के विरोध में धकेलना या खुद गुरुओ का उपहास करना आदि।
  4. अतिनियत गृह: ऐसे नियम जो आडंबर के प्रति उत्प्रेरित करे, साधना में रुकावट उत्पन्न करते हैं; जैसे, क्षमता से ज्यादा योगाभ्यास करना, शीत में शीतल जल पीना, अति स्नान करना, ये सभी अतिनियत गृह कहलाते हैं। हमारे ही देश में लोगों को पीने के जल के लिए 10 किलोमीटर रोज चलना पडता है, और साधक एक ही दिन में 10 बाल्टी जल को अपने प्रयोग में लाते हैं, तो यह एक तरह का सामाजिक अपराध है।
  5. जनसंग: यानी जब साधक जनसम्पर्क पाटियों में अधिक समय देगा,तो उससे वह तनाव, रोगों ओर द्वेष से घिर जाएगा। इसलिए योग अभ्यासी को अकेले या फिर परिवार के साथ समय बिताना चाहिए, और योग के लिए एकाग्र रहना चाहिए।
  6. चंचलता: जहां मन लीन हो जाता है, वहीं प्राण भी लीन हो जाते हैं, जिसका मन अत्यंत चंचल रहता है, उसकी इन्द्रियां उसके वश में नहीं रहती हैं। ऐसे में वह ऐसी नादानी कर देता है, जो उसके योग में बाधा बन जाती है।

आज जगह-जगह साधक कपालभाती प्राणायाम कर रहे  हैं। कोई चलता हुआ, तो कोई लेटा हुआ, तो कई भोजन के तुरंत बाद ही इस क्रिया को करते हैं, जो की ठीक नहीं है। किसी भी प्राणायाम को करने से पहले उसके नियम के बारे में अच्छी तरह पता कर लेने के बाद ही प्राणायाम करना चाहिए, कपालभाती प्राणायाम के मामले में भी वही हो रहा है। इसके इतने महिमा मंडन के बाद ही कोई इसे करने में लगा है लेकिन उनको इसके नुकसान के बारे में कोई समझ नही हैं, इसलिए योग में सावधानियां बरतना अत्यंत आवश्यक है।

उदाहरण के तौर पर  जो व्यक्ति उच्च रक्त चाप, हृदयरोग, हॉर्निया, मिर्गी, स्ट्रोक या किसी तरह के अल्सर से पीड़ित हैं, उनके लिए कपालभाती प्राणायाम ज़हर के समान है। इसी प्रकार शीतली प्राणायाम और शीतकारी प्राणायाम निम्न रक्तचाप, दमा, टी.बी. के रोगियों के लिए शीतकाल में मना है। इसी प्रकार हर्निया के मरीज़ों,गर्भवती महिलाओ, और स्लिप डिस्क के रोगियों के लिए उष्ट्रासन और भुजंगासन घातक हो सकते हैं। इस बात को भली-भांति समझ लेना चाहिए कि योग का अपना विशिष्ट महत्व है, इसलिए योग के साथ यदि हम विज्ञान को भी धारण करेंगे, तभी हम ज्यादा लाभ उठा पायेंगे, क्योंकि विज्ञान सृजनात्मक और विध्वंसात्मक दोनों ही तरह के आविष्कार करता है।

जहां विज्ञान एक ओर परमाणु बम बनाता है और जीवन रक्षक दवाएं बनाता है, वर्तमान समय में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के औचित्य को नकारा नहीं जा सकता है,क्योंकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान से ही हमें कैंसर, एड्स, पार्किंसन, मिर्गी और थैलेसीमिया जैसी बीमारियों का इलाज मिल सका है, जो योग में संभव नहीं।

“इसलिए आवश्यक है कि हम योग में सावधानी, योग का महत्व और चिकित्सा विज्ञान की सहायता लेकर आगे बढ़ें।“

योग गुरू सुनील सिंह विश्व के 20 बड़े योग गुरूओं में से एक हैं

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